एक मित्र ऐसा हो
दिल मे धड़कन जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
आंखों में नूर जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
सीने में सांसो जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
सागर में नमक जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
सुई में धागे जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
फूलो में खुशबू जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
जीवन में खवाबों जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
गंगा में पावनता जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
होठों पे हसीं जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
मंदिर में मूर्त जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
सूरज की किरण जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
मोहब्बत में वफ़ा जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
शायरी में दर्द जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
अंधेरो में दीप जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
दर्द में टीस जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
इन्द्रधनुष में रंग जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
कृष्ण सुदामा जैसा हो
एक मित्र ऐसा हो
जो बिल्कुल तेरे जैसे हो
जो बिल्कुल तेरे जैसा हो......
@प्रदीप सुमनाक्षर
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